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December 25, 2010

वक़्त कब किस का हुआ?

गीत गाता आ रहा हूँ,तुम नए विश्वास भरना,
गर्व से मैं सर उठाऊं ,तुम नया इतिहास रचना.’
कुछ ऐसे ही गुनगुनाता हर बरस नया साल आता है और जाते जाते अनगिनत कुछ खट्टी कुछ मीठी यादें देता चला जाता है.
साल २०१० की विदाई भी अब नज़दीक है यह साल भी कुछ दिनों के बाद इतिहास का एक हिस्सा बन जायेगा.बीतते साल का हिसाब किताब देखूं तो लगता है इस साल में मैंने अपेक्षाकृत बहुत कुछ घटते देखा है शायद इसी ‘देखने ‘ को अनुभव पाना कहा जाता है.
कहते हैं कि हर किसी को ‘वक़्त'से डरना चाहिए ‘ऐसा लोग क्यों कहते हैं कुछ हद्द तक यह भी समझ में आया..और सच कहूँ तो पहले ही जब हम सब अनिश्चतता से घिरे रहते हैं और ऐसे में इस का बदलता बिगड़ता रूप आस पास देखने को मिले तब इस 'वक़्त 'से भी डर लगने लगता है.

इसी वक़्त की बदलती करवट के साथ इस साल बहुतों का बदलता भाग्य ,इस पल में और उस पल में उनकी स्थिति में गहरा अंतर ..यह सब अपनी आँखों के सामने देखना और उनको महसूस करना जीवन के अब तक मिले अनुभवों में एक बड़ा महत्वपूर्ण अनुभव जोड़ गया है.

अजब सा अजब


अजब सी कशमकश ,अजब सी उलझन है ,

अजब सी बैचैनी , अजब सी लाचारी भी,


अजब अजब से न जाने कितने अनुभव हैं,

अजब से मौसम के अजब से हालात हैं ,


अजब मुखोटों में अजब से चेहरे छुपे ,

अजब सवालों के अजब जवाब मिले ,


अजब सी आवाज़ें और अजब ख़ामोशी है,

अजब सी हलचल कहीं ,तो कहीं अजब बेहोशी है


अजब सी राहों में भटक रहे हैं मेरे ख्याल

अजब से धागे हैं जिन में उलझ रहा है मेरा मन,


अजब है यह भी कि अजब सी बात है ये ..

अजब सा अब यह सारा जहान सच में ‘अजब सा’ लगता है.

...............................*****........................................

पिछले दिनों प्रसिद्ध हिंदी उपन्यास ‘गुनाहों का देवता’[धरमवीर भारती जी का लिखित] पढ़ा जो दिलो दिमाग़ पर अजीब सी शून्यता छोड़ गया..शायद उसका अंत मुझे स्वीकार्य नहीं हुआ.. उस से उबरने में ही ८-९ दिन लगे थे और उसके बाद कोई दूसरा उपन्यास हाथ में लेने की हिम्मत नहीं हुई.

उस पर जब हाल ही में फिल्म 'गुज़ारिश' देखी ..कई दिनों तक एक सन्नाटा सा ज़हन में छाया रहा .उस फिल्म का भी कुछ ऐसा असर हुआ कि अब यही लगने लगा है कि ज़िंदगी बहत छोटी है और इसे पूरी तरह जीना चाहिए.
किसे मालूम है कि अगले क्षण ने हमारे लिए क्या और कैसी योजना बना कर रखी है?

समय चक्र

मैं अपने समय चक्र का एक हिस्सा हूँ ,

तुम अपने समय चक्र का एक हिस्सा हो,

कब तक, कौन ,कहाँ तक चल पाता है ?

ये तो बस वक़्त के दफ्तर* में दर्ज़ होता है.

वक़्त का पहिया जहाँ जब भी रुकता है,

ये जिस्म वहीँ उसी पल में सर्द होता है.
--------------*****----------------

[दफ्तर का अर्थ —बही-खाता/रजिस्टर]

अक्सर अपने आस पास होने वाली कुछ अच्छी -बुरी खबरें दिलो दिमाग पर बहुत गहरा असर छोड़ जाती हैं और यक़ीनन कुछ सीखें भी दे जाती हैं….सीखें ….’जीवन को समझने की’,सीखें ..’खुद को जानने की’ ,सीखें.. ‘दुनिया में व्यवहार की..’...........

ने वाले साल २०११ में इस वक़्त का बदलता रंग -रूप और स्वभाव हरेक के लिए खूबसूरत हो,खुशनुमा हो.आने वाला हर पल एक नयी खुशखबर ले कर ही आये इन्हीं शुभकामनाओं के साथ जाते हुए लम्हों को हम भी खुशी खुशी विदा करें.
नयी सोच,नए विचार,नयी योजनायें,नए वादे,नए संकल्प लिए नए वर्ष का स्वागत करें.बीतते हुए इस वर्ष में रह गए अधूरे कार्य नए वर्ष में पूरे हों,हर ओर खुशियाँ हों,देश खूब प्रगति करे.विश्व में शान्ति बहाल हो.

''आप और आपके समस्त परिवार को नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं.''

इस प्रार्थना गीत के साथ इस पोस्ट का समापन करती हूँ , एक ही साईट पर पोस्ट लिखने तक इस गीत के उन्नीस हज़ार चार सौ पचपन डाउनलोड हो चुके हैं.
डाउनलोड mp3 / download or Play Mp3




[यह मूल गीत नहीं है मेरी आवाज़ में film-ankush के गीत का कवर संस्करण है]

82 comments:

सुज्ञ said...

अल्पना जी,

प्रथम कविता अजब में तो आपने गज़ब ही ढा दिया।

वक़्त का पहिया जहाँ जब भी रुकता है,

ये जिस्म वहीँ उसी पल में सर्द होता है.

सत्य अभिव्यक्ति!!

आप और आपके समस्त परिवार को भी नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं.''
और नव-संकल्प की भी जो आपने निर्धारित किये होंगे।

आशीष मिश्रा said...

आपको भी नूतन वर्ष की बहोत ढेर सारी शुभकामनाएँ

पोस्ट की तारीफ करना मेरे लिए तो मुश्किल सा है, क्योकि मेरे ख्याल से कुछ लेखों की तारीफ हर किसी के बस में नहीं होती ...........

पर इतना कहूँगा कि सुन्दर .......अति सुन्दर

प्रणाम

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार said...

आदरणीया अल्पना जी
नमस्कार !
नव वर्ष की पूर्व वेला को समर्पित आलेखवक़्त कब किस का हुआ? पढ़ कर मन गहन विचारों की ओर उन्मुख हो गया … । वर्ष भर का पाना - खोना , मिलना - छूटना … … … भावों के एक सागर में गोते लगाते हुए आत्ममंथन की प्रक्रिया आपके हर पाठक से साक्षात होगी …
अजब सा अजब रचना भी अज़ब है … बहुत सुंदर !
इतनी शक्ति हमें देना दाता , मन का विश्वास कमजोर हो ना … जितना प्रेरक गीत है , आपने उतनी ही निष्ठा और तल्लीनता से गाया है … सुन कर आत्मा को संतुष्टि मिली । आभार !

~*~नव वर्ष २०११ के लिए हार्दिक मंगलकामनाएं !~*~

शुभकामनाओं सहित
- राजेन्द्र स्वर्णकार

मनोज कुमार said...

ज़िंदगी बहत छोटी है और इसे पूरी तरह जीना चाहिए. एकदन सही बात कही है। बहुत अच्छी प्रस्तुति। हार्दिक शुभकामनाएं!
एक आत्‍मचेतना कलाकार

JAGDISH BALI said...

Happy new year to u too.

दर्शन लाल बवेजा said...

thanks
happy new year

AlbelaKhatri.com said...

नया इतिहास रचना.......

waah !

Vijai Mathur said...

आपका आलेख और कवितायेँ प्रेरणास्पद हैं और यथार्थ का चित्रण करती हैं.आपकी आवाज़ में गाया गया गीत अच्छा लगा.
आपको भी सपरिवार हम तीनों की तरफ से नव वर्ष की शुभ कामनाएं.

आभार सहित -

विजय माथुर
श्रीमती पूनम माथुर
यशवन्त माथुर

Kajal Kumar said...

मैं सहमत हूं कि कभी-कभी कुछ रचनाएं इतना प्रभावित करती हैं कि उनकी ख़ुमारी कई-कई दिन तक बनी रहती हैं. यह एक अलग ही अनुभव होता है जो मन को शायद शिथिलता की सीमा तक, बहुत शांत कर देता है...

प्रवीण पाण्डेय said...

नये वर्ष में सब गजब ही गजब हो आपके लिये।

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

अजब ने काफी गज़ब किया ....और पल में सर्द होना ...दोनों रचनाएँ अपनी छाप छोडती हैं ...

नव वर्ष की शुभकामनायें

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

जिन्दगी जीने के लिये ही है वाकई..

Arvind Mishra said...

क्रिसमस और नए वर्ष की बहुत शुभकामनायें -वर्ष २०११ आपके लिए सुख समृद्धि और शांति की अनुपम सौगात लाये !

उस्ताद जी said...

7/10

आपने एक ही पोस्ट में एक साथ बहुत कुछ समेटने का प्रयास किया है ...
आपकी बात..रचना..गुनाहों का देवता..फ़िल्म गुजारिश ..यह सब काकटेल बनकर मन पर गहरा असर छोड़ रहे हैं ...

बहुत सुन्दर

राज भाटिय़ा said...

वाह क्या बात कही आप ने कविता मे बहुत सुंदर, आप की दोनो रचनाओ से सहमत हे..... नये साल की शुभकामनाऎ!!!!!! नये साल शुरु होते ही या अगले दिन देता हूं,या बाद मै कभी भी? उस से पहले कभी नही.. कोई वहम नही लेकिन यह मेरी आदत हे, जन्म दिन हो या कोई त्योहार....... धन्यवाद

Kunwar Kusumesh said...

वाह क्या बात है.
क्रिसमस और नए वर्ष वर्ष की ढेरों शुभकामनायें .

Swarajya karun said...

दिल को छू गया यह आलेख. सुंदर प्रस्तुति. आभार.

उपेन्द्र ' उपेन ' said...

अल्पना जी, दोनों ही कविताये. बहुत ही सुंदर तथा सोंचने को मजबूर करती हुई.. सच गुजारिश फिल्म देख जिंदगी के मतलब समझ में आ जाता है. हर पल को जीभर क़र जी लेना चाहिए. बहुत ही सुंदर प्रस्तुति ... नव वर्ष की मुबारकबाद आपको भी.
फर्स्ट टेक ऑफ ओवर सुनामी : एक सच्चे हीरो की कहानी

केवल राम said...

आदरणीय अल्पना वर्मा जी
कितना संजीदगी से पहचाना है आपने वक़्त को ...एक अलग अंदाज में पेश की गयी इस पोस्ट ने बहुत प्रभावित कर दिया ....आपका बहुत - बहुत शुक्रिया

रश्मि प्रभा... said...

yah rachna mujhe mail karen 31st dec ke liye ... rasprabha@gmail.com per blog link ke saath

mukti said...

कितनी अजीब सी बात है कि 'गुजारिश' मैंने इसीलिये नहीं देखी कि इस समय अकेली हूँ, कहीं डिप्रेशन ना हो जाए, जैसा कि ऐसी फ़िल्में देखकर या उपन्यास पढ़कर अक्सर होता है मेरे साथ.
आपकी दोनों कविताएँ मुझे बहुत अच्छी लगीं... नववर्ष की शुभकामनाएँ !

ѕнαιя ∂я. ѕαηנαу ∂αηι said...

सदियों से ये अजिबो-ग़रीब खेल खेला जा रहा है उपर वाले के द्वारा, कुछ के लिये ये अजब है कुछ के लिये ये ग़ज़ब है, बहरहाल आपको अच्छी रचना के लिये बधाई।

Pratik Maheshwari said...

नमस्ते अल्पना जी,
आज काफी दिनों बाद आपने कुछ पोस्ट किया है..
"समय चक्र" बहुत सुन्दर कृति लगी मुझे..

नए साले में आपके ब्लॉग पर और पोस्ट देखने की इच्छा है..

आभार

"एक लम्हां" मेरे ब्लॉग पर ज़रूर पढियेगा..

Kailash C Sharma said...

कब तक, कौन ,कहाँ तक चल पाता है ?

ये तो बस वक़्त के दफ्तर* में दर्ज़ होता है.

बहुत सटीक प्रस्तुति..दोनों रचनाएँ बहुत सुन्दर..नव वर्ष की शुभ कामनायें

खबरों की दुनियाँ said...

अंदाज-ए-बयाँ कुछ और है … आपको सपरिवार नूतन वर्ष की शुभ कामनाएं ।

Mithilesh dubey said...

बेहतरीन प्रस्तुती.

अनुपमा पाठक said...

सुन्दर रचनायें!
बढ़िया प्रस्तुति!!!

mridula pradhan said...

behad khoobsurat likhi hain aap.

डॉ. मनोज मिश्र said...

तुम नया इतिहास रचना......
सब कुछ इसी में समाहित कर दिया आपनें.
आपको भी नूतन दशक की बहुत सारी मंगल कामनाएं.

muskan said...

बहुत ही सुंदर.

P.N. Subramanian said...

यह काफी खूबसूरत पोस्ट है. अजब तो अजब ही रहा. आभार

वाणी गीत said...

अजब सच में कुछ गज़ब ही है ...
समय कब किसका हुआ है ...खुद समय का भी कहाँ ...वह भी बीता हुआ पल हो जाता है ..

नए वर्ष की आपको भी बहुत शुभकामनयें ..

डॉ.राधिका उमडे़कर बुधकर said...

अल्पना जी बहुत अच्छा लगा आपकी पोस्ट पढ़कर ,सच हैं जीवन बहुत कुछ सिखा देता हैं ,जीवन से बढ़ा गुरु कोई नही होता ,आपका आने वाला साल खुशियों से भरा होगा ,आपको बहुत सारा प्यार तरक्की और खुशियाँ मिलेंगी ,यही सदिच्छा एयर शुभकामना ,मेरा पसंदिता गीत सुनाने के लिए तहे दिल से धन्यवाद
वीणा साधिका

डॉ.राधिका उमडे़कर बुधकर said...

अल्पना जी बहुत अच्छा लगा आपकी पोस्ट पढ़कर ,सच हैं जीवन बहुत कुछ सिखा देता हैं ,जीवन से बढ़ा गुरु कोई नही होता ,आपका आने वाला साल खुशियों से भरा होगा ,आपको बहुत सारा प्यार तरक्की और खुशियाँ मिलेंगी ,यही सदिच्छा एयर शुभकामना ,मेरा पसंदिता गीत सुनाने के लिए तहे दिल से धन्यवाद
वीणा साधिका

रंजना [रंजू भाटिया] said...

ज़िन्दगी बहुत छोटी सी है और इसको भरपूर जीना चाहिए बहुत खूब कहा अल्पना आपने बेहतरीन पोस्ट
अजब मुखोटों में अजब से चेहरे छुपे ,
अजब सवालों के अजब जवाब मिले

बहुत पसंद आया यह

शाहिद मिर्ज़ा ''शाहिद'' said...

वाह अल्पना जी, कमाल की पोस्ट है.
एक दुआ-
अम्न हो नये साल हर दिन चैन हो आराम हो
शाम जाते साल की सब रंज-ओ-गम की शाम हो
आपने देखें हैं जो सपने वो पूरे हों सभी
आपका हर आरज़ू हर चाहतों पर नाम हो

रंजना said...

गुजारिश आपको अच्छी लगी...जानकर बड़ा अच्छा लगा,वर्ना इसे तो फ्लाप ठहरा दिया गया...

आपकी इस सुन्दर पोस्ट ने मन हरा कर दिया है और उसपर आपने जो लाजवाब भजन सुनाया...वाह वाह वाह..

आपको भी सपरिवार नववर्ष की अनंत शुभकामनाएं...

Mukesh Kumar Sinha said...

sach me alpana jee aapke ajab-gajab ke chakkar me puri kavita khatm ho gayee...aur dimag me locha ho gaya...:)
bahut khub!

nav-varsh ki bahut bahut subhkamnaon ke saath...........:)

VIJAY KUMAR VERMA said...

सुन्दर रचना
नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें

amit-nivedita said...

सुंदर रचना । नववर्ष की शुभकामनाएं ।

mehhekk said...

अजब अजब से न जाने कितने अनुभव हैं,

अजब से मौसम के अजब से हालात हैं ,

waah ekdam ajab si sundar rachana,magar sach kahun mein in do panktion se gujri hun shayad gujre sal mein.hum yaha sab thik hai,aur aasha karti hun aap bhi swasth rahe.naya saal aap sab ko bhi bahut mubarak ho alpanaji.aap jaise khubsurat doston ki khubsurat yaadien bhi tho hai saath.flim gujarish dekhne ke baad mann mein bahut ajib hulchul huyi thi,sahi nabz pakdi hai.

Harsh said...

waah... maja aa gaya

Harsh said...

bahut achchi post hai

सोमेश सक्सेना said...

अल्पना जी नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ।
अच्छा लगा आपके ब्लॉग पर आकर।

सुलभ § Sulabh said...

अजब सी दास्तान है इस छोटी सी जिंदगी की. समझ रहा हूँ और सहेज रहा हूँ.
असीम शुभकामनाये!!

हरकीरत ' हीर' said...

गर्व से मैं सर उठाऊं ,तुम नया इतिहास रचना.’
इतिहास की तो हमें आपसे ही उम्मीदें हैं अल्पना जी .....

क्योंकि ....
अजब सी राहों में भटक रहे हैं आपके ख्याल
अजब से धागे हैं जिन में उलझ रहा है आपका मन...
तो बधाई आपको ....


नववर्ष की शुभकामनाएं ......!!

शुभम जैन said...

नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाये...

यशवन्त माथुर said...

आप को सपरिवार नववर्ष 2011 की हार्दिक शुभकामनाएं .

ज्योति सिंह said...

alpana tumahari bahut yaad aati rahi ,teen mahine se blog par nahi aai aur tumhari khabar bhi nahi lagi kuchh ,tumhare gaane bhi bahut mis ki ,abhi sabko badhai de aau phir tumse aur charcha karoongi .happy new year,aane wala naya saal tumahara bhi khoobsurat ho .rachnaye bahut sundar hai tumhari tarah .

वन्दना अवस्थी दुबे said...

हां अल्पना जी, गुनाहों का देवता पढने के बाद कई दिनों तक मैने भी कुछ नहीं पढा था...same feelings..
नये वर्ष की अनन्त-असीम शुभकामनाएं.

: केवल राम : said...

नव वर्ष 2011 की हार्दिक शुभकामनायें ......स्वीकार करें ..
आशा है नव वर्ष आपके जीवन में खूब सारी खुशियाँ लेकर आएगा ....बहुत - बहुत शुभकामना

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" said...

मंगलमय नववर्ष और सुख-समृद्धिमय जीवन के लिए आपको और आपके परिवार को अनेक शुभकामनायें !

Vijai Mathur said...

Happy new Year 2011 to you and all of your family.

वीना said...

आपकी पोस्ट काबिले तारीफ है....गीत तो और भी खूबसूरत है....नए साल की हार्दिक बधाई

दिलीप कवठेकर said...

bade dino baad yahaa par aa payaa. aapkaa bhi post shayad lambe arase baad aayaa hai.

aap ko aur sabhee bloggers sathiyo ko naye saal kee shubhkamanaye.

दिलीप कवठेकर said...

kavitaa laajawaab hai, aur geet to kya kahe, badhiya hai.

Mukesh Kumar Mishra said...

सुंदर रचना....नए साल की हार्दिक बधाई

Alka Ray said...

aap bahut sundar likhti hain
har baat ko bahut ache se explain karti hain.
kavita bhi bahut achi lagi.
aapko naye saal ki hardik badhayi
happy new year

जयकृष्ण राय तुषार said...

nav varsh ki shubhkamnayen

दिगम्बर नासवा said...

गुज़रे हुवे वक़्त का दस्तावेज़ है आपकी पोस्ट .... बदलता है वक़्त ये तो सचाई है जीवन की और सभी को झेलनी पढ़ती है ... बहुत कुछ कभी कभी जेहन में गहरे उतर जाता है और जकड लेता है मन मस्तिष्क को .... गुजारिश देखना कुछ ऐसी की अनुभूति है ... जो आया है अपने अपने हिस्से की धूप देख कर ही जाएगा ... दोनों कवितायें बहुत गहरी और कहती हुयी हैं ...
आपको और आपके समस्त परिवार को नव वर्ष मंगलमय हो ...

Meenu Khare said...

वक़्त का पहिया जहाँ जब भी रुकता है,

ये जिस्म वहीँ उसी पल में सर्द होता है.

बहुत गहरी अभिव्यक्ति!!

आप और आपके परिवार को भी नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं.''

अन्जान...... said...

वाकई बहुत ही अजब की कविता है..मज़ा आ गया पढ़ के..साधुवाद..

निर्मला कपिला said...

वक्त यूँ ही चलता रहेगा। बहुत सुन्दर पोस्ट है। इतनी शक्ति हमे देना दाता---0- बस यही तो चाहिये, वर्ना सुख दुख तो जीवन का हिस्सा हैं। नये साल की सपरिवार हार्दिक शुभकामनायें।

राजीव थेपड़ा said...

थोडा भर-भर-सा गया हूँ....इतना सारा सब कुछ पढ़कर....अब उससे उबरूं तो कुछ लिखूं....अभी कुछ महसूस कर रहा हूँ मैं.....उसे महसूस करने दो....!!!!

एस.एम.मासूम said...

बहुत अच्छी प्रस्तुति। हार्दिक शुभकामनाएं!

MANOJ KUMAR said...

गीत गाता आ रहा हूँ,तुम नए विश्वास भरना,
गर्व से मैं सर उठाऊं ,तुम नया इतिहास रचना.
काफी प्रेरक पंक्ति है. न केवल आपका ब्लाग वरन सभी रचनाएँ , गीत अद्भुत हैं. अति सुन्दर. यहाँ आकर मन को ख़ुशी भी मिली, शांति भी. नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ-

रचना दीक्षित said...

कुछ बातें होती ही ऐसी हैं की मन पर गहरे प्रभाव छोड़ जाती जाती हैं. छोटी सी जिंदगी बहुत कुछ सीखा जाती है बस सीखने की कोशिश हौसला और हिम्मत चाहिए.बहुत अच्छी प्रस्तुति। नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें

अभिन्न said...

bahut khoobsurat ehsaas likhen hain aap ne.likhte rahiye

सुमन'मीत' said...

bahut achhi kavitayen.....
happy new year...

Anonymous said...

भावपूर्ण कविता,मधुर गीत ,विचारों से सहमत,समय चक्र में सभी हैं .
अच्छी पोस्ट है.

सूर्य गोयल said...

अल्पना जी आज पता नहीं कैसे घूमते-घूमते आपके ब्लॉग पर आना हुआ. आकर जैसे निहाल ही हो गया. दिल से आपके ब्लॉग का चक्कर काट कर आया हूँ. कविता का तो ज्यादा शौक नहीं है लेकिन गीत सुनकर बेहद प्रसन्नता हुई.

शोभना चौरे said...

अल्पनाजी
बहुत देर से आपके ब्लाग पर आई हूँ
अजब का प्रयोग बहुत ही खूबसूरती के साथ किया है आपने |
और यह प्रार्थना अगर जीवन में उतार ले तो क्या बात है बहुत ही मीठा गया है आपने |
"गुनाहों के देवता "पढने के बाद यही हल होता है मई तो कितनी बार पढ़ चुकी हूँ और हर बार नये अर्थ मिलते है |
गुजारिश फिल्म वास्तव में जिन्दादिली से जीने और इस प्रार्थना का संदेश देती हुई सुन्दर फिल्म है |
अगर आपने "प्रथम प्रतिश्रुति "और "सुवर्णलता" उपन्यास जो की आशापूर्णाजी द्वारा लिखित ज्ञानपीठ प्रकाशन से है अगर पढ़े है तो क्रप्या बताये कैसे लगे? और अगर नहीं पढ़े है तो जरुर पढियेगा |
शुभकामनाये |

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

अल्‍पना जी, लाख टके की बात कह दी आपने। वक्‍त सचमुच उसी का होता है, जो उसकी कीमत को समझता है।
हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।

---------
पति को वश में करने का उपाय।

राजीव थेपड़ा said...

हा...हा....हा....हा....हा....दसवीं कक्षा के जमाने में पढ़ा था गुनाहों के देवता को.....एक सांस में उसे पढने के लिए समय ना मिलने के कारण बीमारी का बहाना कर छत पर जा-जाकर पढ़ा करता उसे....कई-कई बार पढ़ा.....और कई-कई बार रोया......और एक बार तो मैं फफक-फफक कर रोया था.....ऐसा था इस उपन्यास का रस...आज सोचता हूँ तो......हा....हा....हा....हा.....हर चीज़ का एक वक्त होता....कहते हैं की मुहब्बत का कोई वक्त नहीं होता.....मगर होता है जनाब होता है मुहब्बत का भी वक्त....जब वो आपके भीतर उफान मार रही होती है.....मगर आपके पास कोई नहीं होता....आब खुद में मुहब्बत से भरे होते हैं.....और बस इंतज़ार कर रहे होते हैं की कोई मिल जाए.....और जब कोई मिल जाता है तो आपके भीतर की सारी मुहब्बत उस पर उड़ेल दी जाती है.....मगर वक्त इंतज़ार भी तो नहीं करता आपका या किसी और का....सरपट दौड़ता जाता है ....देखते-न-देखते आपके कानों के आस-पास के कोने सफ़ेद हो जाते हैं.....आपके बच्चे तब उस उम्र के हो चुके होते हैं....जब आपने पढ़ी थी गुनाहों का देवता या फिर कोई और किताब....और आप रोया करते थे....जब आप किसी के लिए तड़पा करते थे....दिल का वो दर्द अब आपको याद ही नहीं आता....मुब्बत एक मज़ाक लगा करती है .....शायद इसीलिए आज आप अपने दिन भूल चुके होते हैं .....शायद...इसीलिए अपने बच्चों को ऐसी बातों पर डांटा करते हैं...लेकिन सच बाताऊं दोस्तों....अगर वक्त मिल जाए.....और आप अपने काम-काज को तिलांजलि दे सकें....या कुछ देर के लिए भूल कर ही सही...मुहब्बत को पा सकते हैं....मुहब्बत से सब कुछ संवार सकते हैं.....हाँ सच मेरे दोस्तों....सच.....सच्ची.....सच्च.....कसम से....!!!
अजब है सच यह मुहब्बत
रहती है दिल में कशमकश...!!
अजब है यह छोटा सा दिल
हर शै भागता-दौड़ता-सा हुआ...!!
अजब है हमारे भीतर की बात
हमसे छुटकारा पाने को व्यग्र....!!
अजब से हो जाया करते हैं हम
जब कोई मिल जाता है अपना-सा..!!
और अपनों के बीच ही रहते हुए
हम हो जाते बेगाने सबके लिए...!!
अजब-सा लगता है हमारा चेहरा
कोई और ही झांकता है उसमें से...!!
तो मुहब्बत से भरे हुए हम सब
इतनी दुश्मनायी में क्यूँ रहते हैं...!!
गर इश्क आदमी का फन है "गाफिल"
इसमें इतने आततायी क्यूँ बसा करते हैं...!!

राजीव थेपड़ा said...

हा...हा....हा....हा....हा....दसवीं कक्षा के जमाने में पढ़ा था गुनाहों के देवता को.....एक सांस में उसे पढने के लिए समय ना मिलने के कारण बीमारी का बहाना कर छत पर जा-जाकर पढ़ा करता उसे....कई-कई बार पढ़ा.....और कई-कई बार रोया......और एक बार तो मैं फफक-फफक कर रोया था.....ऐसा था इस उपन्यास का रस...आज सोचता हूँ तो......हा....हा....हा....हा.....हर चीज़ का एक वक्त होता....कहते हैं की मुहब्बत का कोई वक्त नहीं होता.....मगर होता है जनाब होता है मुहब्बत का भी वक्त....जब वो आपके भीतर उफान मार रही होती है.....मगर आपके पास कोई नहीं होता....आब खुद में मुहब्बत से भरे होते हैं.....और बस इंतज़ार कर रहे होते हैं की कोई मिल जाए.....और जब कोई मिल जाता है तो आपके भीतर की सारी मुहब्बत उस पर उड़ेल दी जाती है.....मगर वक्त इंतज़ार भी तो नहीं करता आपका या किसी और का....सरपट दौड़ता जाता है ....देखते-न-देखते आपके कानों के आस-पास के कोने सफ़ेद हो जाते हैं.....आपके बच्चे तब उस उम्र के हो चुके होते हैं....जब आपने पढ़ी थी गुनाहों का देवता या फिर कोई और किताब....और आप रोया करते थे....जब आप किसी के लिए तड़पा करते थे....दिल का वो दर्द अब आपको याद ही नहीं आता....मुब्बत एक मज़ाक लगा करती है .....शायद इसीलिए आज आप अपने दिन भूल चुके होते हैं .....शायद...इसीलिए अपने बच्चों को ऐसी बातों पर डांटा करते हैं...लेकिन सच बाताऊं दोस्तों....अगर वक्त मिल जाए.....और आप अपने काम-काज को तिलांजलि दे सकें....या कुछ देर के लिए भूल कर ही सही...मुहब्बत को पा सकते हैं....मुहब्बत से सब कुछ संवार सकते हैं.....हाँ सच मेरे दोस्तों....सच.....सच्ची.....सच्च.....कसम से....!!!
अजब है सच यह मुहब्बत
रहती है दिल में कशमकश...!!
अजब है यह छोटा सा दिल
हर शै भागता-दौड़ता-सा हुआ...!!
अजब है हमारे भीतर की बात
हमसे छुटकारा पाने को व्यग्र....!!
अजब से हो जाया करते हैं हम
जब कोई मिल जाता है अपना-सा..!!
और अपनों के बीच ही रहते हुए
हम हो जाते बेगाने सबके लिए...!!
अजब-सा लगता है हमारा चेहरा
कोई और ही झांकता है उसमें से...!!
तो मुहब्बत से भरे हुए हम सब
इतनी दुश्मनायी में क्यूँ रहते हैं...!!
गर इश्क आदमी का फन है "गाफिल"
इसमें इतने आततायी क्यूँ बसा करते हैं...!!

Dimple Maheshwari said...

seekhne ko bht kuchh..

Dimple Maheshwari said...

seekhne ko bht kuchh..

Geetsangeet said...

'गुनाहों का देवता' लीक से हटकर उपन्यास है। इसका अंत विचलित अवश्य ही करता है पाठकों को।

लीक से हट कर बनी या सृजित रचनाएँ या तो पटरी से उतर जाती हैं या फिर आसमान की बुलंदियों को छूती हैं। उन्हें मध्यम मार्ग पसंद
नहीं होता।

Geetsangeet said...

जब तक cmindia की नई क्विज़ प्रस्तुत हो, इस पुरानी क्विज़ को हल करें। http://rythmsoprano.blogspot.com/2011/01/blog-post_3129.html

kavita said...

कविता दोनों बेहद अच्छी हैं .समय चक्र खास पसंद आई.

Surendrashukla" Bhramar" said...

अजब सी आवाज़ें और अजब ख़ामोशी है,

अजब सी हलचल कहीं ,तो कहीं अजब बेहोशी है

अल्पना जी नमस्कार बहुत सुन्दर रचनाएँ उपरी पंक्ति बहुत अच्छी लगी सुन्दर छवियाँ खुद ही बहुत कुछ बोल जाती हैं बधाई और शुभ कामनाएं

सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर ५

Surendrashukla" Bhramar" said...

अजब सी आवाज़ें और अजब ख़ामोशी है,

अजब सी हलचल कहीं ,तो कहीं अजब बेहोशी है

अल्पना जी नमस्कार बहुत सुन्दर रचनाएँ उपरी पंक्ति बहुत अच्छी लगी सुन्दर छवियाँ खुद ही बहुत कुछ बोल जाती हैं बधाई और शुभ कामनाएं
सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर ५